ट्रम्प की पार्टी को 10 उम्मीदवारों से चुनौती

अमेरिका में आज मध्यावधि चुनाव हैं। इसके तहत सीनेट यानी अमेरिकी संसद के उच्च सदन की 100 में से 35 सीटों और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स यानी निचले सदन की सभी 435 सीटों पर सांसद चुने जाएंगे। इस बार के चुनाव में रिकॉर्ड 12 भारतीय-अमेरिकियों के सामने अमेरिकी संसद में चुने जाने का मौका है।

10 साल पहले तक यूएस कांग्रेस (संसद) में सिर्फ बॉबी जिंदल ही इकलौते भारतीय-अमेरिकी थे। 2016 में रिकॉर्ड 5 भारतीय अमेरिकी संसद पहुंचे। इन सभी ने डेमोक्रेट पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता था। इस बार के 12 भारतवंशी उम्मीदवारों में 10 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।

अमेरिका की आबादी में अभी भारतीय 1% से भी कम हैं। हालांकि, राजनीति में उनका प्रभाव देखते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस साल भी 9 भारतीयों को उम्मीदवार बनाया है। इनमें से 4 अपनी जीती हुई सीट बचाने के लिए लड़ेंगे। दूसरी तरफ रिपब्लिकन पार्टी ने भी 2 उम्मीदवारों टिकट दिया है, जबकि एक पूर्व रिपब्लिकन इस साल निर्दलीय ही चुनाव लड़ेंगे।

भारत की समोसा ब्रिगेड को बचानी होंगी अपनी सीटें
2012 के चुनाव में भारत के डॉक्टर अमी बेरा ने चुनाव जीतकर हाउस ऑफ रिप्रेंजेटेटिव्स में जगह बनाई थी। वे भारत के दिलीप सिंह सौंद (1957) और बॉबी जिंदल (2004) के बाद संसद पहुंचने वाले तीसरे भारतीय थे। अमी बेरा के चुने जाने के बाद भारतीय मूल के तीन और उम्मीदवारों ने चुनाव जीतकर संसद में जगह बना ली। इनमें इलिनॉय से जीतकर राजा कृष्णमूर्ति, कैलिफोर्निया से रो खन्ना और वॉशिंगटन से प्रमिला जयपाल सदन में पहुंचे थे। सदन में चार सांसदों के पहुंचने के बाद इस ग्रुप को समोसा ब्रिगेड नाम से पहचाना जाता है। 

प्रमिला को आसान जीत की उम्मीद
मध्यावधि चुनाव में भारतीय मूल की पहली महिला सांसद प्रमिला जयपाल की जीत आसान मानी जा रही है। लेकिन तीन बार के सांसद अमी बेरा का मुकाबला कैलिफोर्निया सीट पर रिपब्लिकन के मजबूत नेता एंड्रू ग्रांट से है। इलिनॉय सीट से रिपब्लिकन पार्टी ने कृष्णमूर्ति के सामने भारतीय-अमेरिकी जितेंद्र दिगांवकर को खड़ा किया है।

खास बात यह है कि दोनों ही नेता प्राइमरी चुनाव में निर्विरोध जीते थे। खन्ना को कैलिफोर्निया की सिलिकॉन वैली में रिपब्लिकन रॉन कोहेन का सामना करना है। हालांकि, भारतीय-अमेरिकियों की बहुलता की वजह से सिलिकॉन वैली में मुकाबला आसान माना जा रहा है।

मजबूत विपक्ष को कड़ी टक्कर देंगे पहली बार चुनाव में उतरने वाले उम्मीदवा
इस बार चुनाव लड़ रहे 12 भारतवंशियों में से 8 नए उम्मीदवार हैं। इनमें अरिजोना से हीरल तिपिरनेनी और अनीता मलिक, टेक्सास से पूर्व विदेश सचिव श्री प्रेस्टन कुलकर्णी, ओहायो से भारतीय-तिब्बत मूल के पहले उम्मीदवार अाफताब पुरेवाल और फ्लोरिडा से संजय पटेल शामिल हैं। इन सभी को डेमोक्रेट की तरफ से टिकट दिया गया है, जबकि रिपब्लिकन की तरफ से हैरी अरोड़ा दूसरे भारतीय मूल के उम्मीदवार हैं।

हैरी अरोड़ा का सामना कनेक्टिकट के डेमोक्रेट उम्मीदवार जिम हाइम्स से होगा। हालांकि, हैरी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने हाइम्स के मुकाबले उन्होंने बेहद कम समय में दोगुनी राशि जमा कर ली। आफताब पुरेवल को पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपना समर्थन दिया है, जबकि कुलकर्णी को पूर्व अमेरिकी राजदूत रिचर्ड वर्मा ने सपोर्ट किया है।

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