पश्चिमी यूपी की 22 में से 11 सीटों पर लड़ेगी बसपा, सपा को 8, देखें पूरी लिस्ट
बहुजन समाज पार्टी (BSP) और समाजवादी पार्टी (SP) के गठबंधन में राष्ट्रीय लोकदल भी शामिल हो गई है. लोकसभा चुनाव 2019 में उत्तर प्रदेश में नरेंद्र मोदी के विजयरथ को रोकने के लिए तीन दलों के बीच सीट को लेकर सहमति बन गई है. बुधवार को आरएलडी के उपाध्यक्ष जयंत सिंह ने अखिलेश यादव के साथ बैठक की थी, जिसके बाद आरएलडी को सूबे की तीन सीटें दी गई हैं और पार्टी का एक उम्मीदवार सपा के चुनाव चिन्ह पर उतरेगा. सूत्रों के मुताबिक पश्चिम यूपी की लोकसभा सीटों को लेकर तीनों दलों में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय हो गया है.
सूत्रों की मानें तो पश्चिम यूपी की 22 लोकसभा सीटों में से ज्यादातर सीटें बहुजन समाज पार्टी के खाते में गई है. पश्चिम की 11 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. जबकि 8 सीटों पर सपा और 3 सीटों पर आरएलडी को मिली हैं.सूबे की अभी 56 सीटों पर तस्वीर साफ नहीं हुई है.
बता दें कि सपा और बसपा ने 23 साल की आपसी दुश्मनी को भुलाकर गठबंधन किया है. शनिवार को अखिलेश यादव और मायावती ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस करके गठबंधन का ऐलान किया था. सीट शेयरिंग को लेकर मायावती ने घोषणा की थी कि सूबे की 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 सीटों पर सपा-बसपा चुनाव लड़ेगीं. इसके अलावा रायबरेली और अमेठी सीट पर कांग्रेस के खिलाफ सपा-बसपा गठबंधन अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी. बाकी बची 2 सीटें सहयोगी दल के लिए रखी गई थी.
सपा-बसपा गठबंधन में तीसरी पार्टी के रूप में राष्ट्रीय लोकदल की एंट्री हुई है. सपा-बसपा गठबंधन ने आरएलडी को पहले 2 सीटें देने की बात कही थी, जिस पर अजित सिंह राजी नहीं थे. वो चार सीटों की लगातार मांग रहे थे. इसको लेकर बुधवार को आरएलडी नेता जयंत चौधरी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ लखनऊ में बैठक हुई थी. इसी दौरान सीट शेयरिंग का फॉर्मूल तय हुआ, जिसमें आरएलडी को बागपत, मथुरा और मुजफ्फरनगर सीटें देना का फॉर्मूला तय हुआ है. इस तरह से आरएलडी को तीसरी सीट सपा को अपने कोटे से देना होगा.
'पूरा सच' अखबार ने किया था खुलासा
सिरसा में हुए दो साध्वियों के साथ हुए रेप की खबर को छत्रपति ने अपने अखबार 'पूरा सच' में छापा था. ये पूरी घटना कई दिनों तक दबी रही थी. इस पूरी घटना का खुलासा जिस गुमनाम चिट्ठी से हुआ वो छत्रपति ने अपने अखबार में प्रकाशित की थी. उस वक्त यह चिट्ठी तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी, चीफ जस्टिस पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट, समेत कई संस्थानों में भेजी थी. तीन पेज की चिट्ठी हाथ आने के बाद छत्रपति ने डेरा प्रमुख के बारे में अपने अखबार में छापा था. इसके कुछ दिन बाद ही पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस चिट्ठी का संज्ञान लेते हुए सिरसा के डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज को इसकी जांच कराने का आदेश दिया. जिसके बाद जज ने यह जांच सीबीआई को सौंपी.
अक्टूबर 2002 में हुई हत्या
अक्टूबर 24, 2002 को छत्रपति पर घर के बाहर कुछ अज्ञात लोगों ने हमला किया. उनकी गोलियों से भून कर हत्या कर दी गई. पिता की हत्या के बाद उनका बेटा अंशुल न्याय के लिए भटकता रहा, लेकिन आखिरकार आज इस मामले में कोर्ट राम रहीम की सजा पर फैसला सुनाएगा.
मामला कब दर्ज हुआ...
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चिट्ठी पर संज्ञान लेने के बाद दिसंबर 2002 में सीबीआई की चंडीगढ़ यूनिट ने इस मामले में धारा 376, 506 और 509 के तहत मामला दर्ज किया था और जांच की. इस मामले में राम रहीम को जेल भी हुई थी.
दरअसल, डांस बार मालिकों को किसी भी धार्मिक या शैक्षणिक संस्था से एक किलोमीटर की दूरी पर डांस बार बनाने का आदेश दिया गया था, जिसके बाद डांस बार मालिकों की ओर से इस तरह की प्रतिबंध पर आपत्ति जताई गई और मामला कोर्ट में पहुंच गया. उन्होंने दावा किया है कि बड़े शहरों में इन नियमों का पालन करना संभव नहीं है.
उन्होंने यह भी दावा किया कि 11.30 बजे से डांस बार को बंद करने का एक और प्रतिबंध भेदभावपूर्ण है, जबकि केंद्र सरकार ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को चौबीसों घंटे चलाए जाने की अनुमति दे रखी है. डांस बार मालिकों ने सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उनका लाइसेंस रिन्यूवल नहीं किया जा रहा है. नए लाइसेंस भी नहीं दिए जा रहे.
सूत्रों की मानें तो पश्चिम यूपी की 22 लोकसभा सीटों में से ज्यादातर सीटें बहुजन समाज पार्टी के खाते में गई है. पश्चिम की 11 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. जबकि 8 सीटों पर सपा और 3 सीटों पर आरएलडी को मिली हैं.सूबे की अभी 56 सीटों पर तस्वीर साफ नहीं हुई है.
बता दें कि सपा और बसपा ने 23 साल की आपसी दुश्मनी को भुलाकर गठबंधन किया है. शनिवार को अखिलेश यादव और मायावती ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस करके गठबंधन का ऐलान किया था. सीट शेयरिंग को लेकर मायावती ने घोषणा की थी कि सूबे की 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 सीटों पर सपा-बसपा चुनाव लड़ेगीं. इसके अलावा रायबरेली और अमेठी सीट पर कांग्रेस के खिलाफ सपा-बसपा गठबंधन अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी. बाकी बची 2 सीटें सहयोगी दल के लिए रखी गई थी.
सपा-बसपा गठबंधन में तीसरी पार्टी के रूप में राष्ट्रीय लोकदल की एंट्री हुई है. सपा-बसपा गठबंधन ने आरएलडी को पहले 2 सीटें देने की बात कही थी, जिस पर अजित सिंह राजी नहीं थे. वो चार सीटों की लगातार मांग रहे थे. इसको लेकर बुधवार को आरएलडी नेता जयंत चौधरी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ लखनऊ में बैठक हुई थी. इसी दौरान सीट शेयरिंग का फॉर्मूल तय हुआ, जिसमें आरएलडी को बागपत, मथुरा और मुजफ्फरनगर सीटें देना का फॉर्मूला तय हुआ है. इस तरह से आरएलडी को तीसरी सीट सपा को अपने कोटे से देना होगा.
'पूरा सच' अखबार ने किया था खुलासा
सिरसा में हुए दो साध्वियों के साथ हुए रेप की खबर को छत्रपति ने अपने अखबार 'पूरा सच' में छापा था. ये पूरी घटना कई दिनों तक दबी रही थी. इस पूरी घटना का खुलासा जिस गुमनाम चिट्ठी से हुआ वो छत्रपति ने अपने अखबार में प्रकाशित की थी. उस वक्त यह चिट्ठी तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी, चीफ जस्टिस पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट, समेत कई संस्थानों में भेजी थी. तीन पेज की चिट्ठी हाथ आने के बाद छत्रपति ने डेरा प्रमुख के बारे में अपने अखबार में छापा था. इसके कुछ दिन बाद ही पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस चिट्ठी का संज्ञान लेते हुए सिरसा के डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज को इसकी जांच कराने का आदेश दिया. जिसके बाद जज ने यह जांच सीबीआई को सौंपी.
अक्टूबर 2002 में हुई हत्या
अक्टूबर 24, 2002 को छत्रपति पर घर के बाहर कुछ अज्ञात लोगों ने हमला किया. उनकी गोलियों से भून कर हत्या कर दी गई. पिता की हत्या के बाद उनका बेटा अंशुल न्याय के लिए भटकता रहा, लेकिन आखिरकार आज इस मामले में कोर्ट राम रहीम की सजा पर फैसला सुनाएगा.
मामला कब दर्ज हुआ...
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चिट्ठी पर संज्ञान लेने के बाद दिसंबर 2002 में सीबीआई की चंडीगढ़ यूनिट ने इस मामले में धारा 376, 506 और 509 के तहत मामला दर्ज किया था और जांच की. इस मामले में राम रहीम को जेल भी हुई थी.
दरअसल, डांस बार मालिकों को किसी भी धार्मिक या शैक्षणिक संस्था से एक किलोमीटर की दूरी पर डांस बार बनाने का आदेश दिया गया था, जिसके बाद डांस बार मालिकों की ओर से इस तरह की प्रतिबंध पर आपत्ति जताई गई और मामला कोर्ट में पहुंच गया. उन्होंने दावा किया है कि बड़े शहरों में इन नियमों का पालन करना संभव नहीं है.
उन्होंने यह भी दावा किया कि 11.30 बजे से डांस बार को बंद करने का एक और प्रतिबंध भेदभावपूर्ण है, जबकि केंद्र सरकार ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को चौबीसों घंटे चलाए जाने की अनुमति दे रखी है. डांस बार मालिकों ने सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उनका लाइसेंस रिन्यूवल नहीं किया जा रहा है. नए लाइसेंस भी नहीं दिए जा रहे.
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