रफ़ाल सौदे के कुछ दस्तावेज़ चोरी हो गए: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार
सुप्रीम कोर्ट में रफ़ाल मामले पर पुनर्विचार याचिका की सुनवाई में बुधवार को एटॉर्नी जनरल (एजी) केके वेणुगोपाल ने कहा कि इस लड़ाकू विमान के सौदे से जुड़े कुछ ख़ास दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी हो गए हैं.
सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत भूषण ने जब एक नोट पढ़ना शुरू किया तो वेणुगोपाल ने आपत्ति जताई. भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि रफ़ाल सौदे से जुड़ी जांच की पुनर्विचार याचिका ख़ारिज नहीं करनी चाहिए क्योंकि 'अहम तथ्यों' को सरकार दबा नहीं सकती है.
रफ़ाल पर पुनर्विचार याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और केएम जोसेफ़ की बेंच कर रही है.
इसी सुनवाई के दौरान वेणुगोपाल ने कहा कि रक्षा मंत्रालय से नौकरशाहों ने ऐसे दस्तावेज चुरा लिए हैं जिसकी जांच अभी लंबित है.
सुनवाई के दौरान मौजूद वरिष्ठ क़ानूनी संवाददाता के सुचित्रा मोहंती अनुसार एजी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि गोपनीयता के क़ानून के अनुसार चोरी करने वालों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है.
एजी ने कहा कि फ़ाइल चोरी की गई और एक राष्ट्रीय दैनिक अख़बार 'द हिन्दू' ने इसे प्रकाशित कर दिया.
एजी से जस्टिस रंजन गोगोई ने पूछा कि सरकार ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है तो वेणुगोपाल ने कहा, ''हमलोग इसकी जांच कर रहे हैं कि फ़ाइल चोरी कैसे हुई. एजी ने कहा कि द हिन्दू ने गोपनीय फ़ाइल को छापा है. हाल ही में द हिन्दू ने रफ़ाल सौदे से जुड़ी कई रिपोर्ट छापी हैं जिनमें बताया गया है कि सरकार ने कई नियमों का उल्लंघन किया है.''
वेणुगोपाल ने कहा कि रक्षा सौदों का संबंध राष्ट्र की सुरक्षा से होता है और ये काफ़ी संवेदनशील हैं. एजी ने कहा कि अगर सब कुछ मीडिया, कोर्ट और पब्लिक डिबेट में आएगा तो दूसरे देश सौदा करने से बचेंगे.
नरेंद्र मोदी सरकार ने फ़्रांस से 2016 में रफ़ाल सौदे पर हस्ताक्षर किया था. 59,000 करोड़ रुपए की इस डील में फ़्रांस की डसॉ कंपनी से भारत को 36 लड़ाकू विमान मिलने हैं.
चेक रिपब्लिक के रहने वाले माइकल प्रासेक ने शायद ये सोचा भी न हो कि जिस शेर को वो पाल रहे हैं और प्रशासन से लड़कर भी अपने पास रख रहे हैं, वो उनकी ही जान ले लेगा.
33 साल के माइकल प्रासेक की लाश उसी पिंजरे में मिली जहां उन्होंने अपना प्यारा शेर रखा था.
माइकल प्रासेक अपने घर के पीछे एक शेर और शेरनी को पाल रहे थे. वह साल 2016 में इस शेर को लेकर आए थे और तब उसकी उम्र नौ साल थी. इसके बाद प्रजनन के लिए पिछले साल वो एक शेरनी को भी लेकर आए.
लेकिन माइकल जब इन्हें लेकर आए तो आसपास के लोगों ने इस पर आपत्ति जताई थी. उन्हें डर था कि शेर और शेरनी लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
पर इनसे जुड़े जोखिम जानने के बावजूद भी माइकल जानवरों को जीडीशोफ गांव में अपने घर के पीछे बने बाड़ों में रखते रहे.
प्रशासन ने भी उन्हें ऐसे जंगली जानवर रखने की अनुमति नहीं दी थी. पहले उन्हें पिंजरे बनाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था और बाद में अवैध प्रजनन के लिए जुर्माना लगाया था.
चेक रिपब्लिक में इन जानवरों को रखने की कोई वैकल्पिक सुविधा न होने और जानवरों के साथ प्रताड़ना के कोई प्रमाण न मिलने की वजह से शेर और शेरनी को वहां से नहीं हटाया जा सका.
इस तरह उन्हें शेर को रखने की मंज़ूरी मिल गई. लेकिन पिछली गर्मियों में माइकल प्रासेक तब ख़बरों में आ गए जब वो अपनी शेरनी को लेकर वॉक पर गए थे और एक साइकिल सवार उनकी शेरनी से टकरा गया था.
सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत भूषण ने जब एक नोट पढ़ना शुरू किया तो वेणुगोपाल ने आपत्ति जताई. भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि रफ़ाल सौदे से जुड़ी जांच की पुनर्विचार याचिका ख़ारिज नहीं करनी चाहिए क्योंकि 'अहम तथ्यों' को सरकार दबा नहीं सकती है.
रफ़ाल पर पुनर्विचार याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और केएम जोसेफ़ की बेंच कर रही है.
इसी सुनवाई के दौरान वेणुगोपाल ने कहा कि रक्षा मंत्रालय से नौकरशाहों ने ऐसे दस्तावेज चुरा लिए हैं जिसकी जांच अभी लंबित है.
सुनवाई के दौरान मौजूद वरिष्ठ क़ानूनी संवाददाता के सुचित्रा मोहंती अनुसार एजी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि गोपनीयता के क़ानून के अनुसार चोरी करने वालों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है.
एजी ने कहा कि फ़ाइल चोरी की गई और एक राष्ट्रीय दैनिक अख़बार 'द हिन्दू' ने इसे प्रकाशित कर दिया.
एजी से जस्टिस रंजन गोगोई ने पूछा कि सरकार ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है तो वेणुगोपाल ने कहा, ''हमलोग इसकी जांच कर रहे हैं कि फ़ाइल चोरी कैसे हुई. एजी ने कहा कि द हिन्दू ने गोपनीय फ़ाइल को छापा है. हाल ही में द हिन्दू ने रफ़ाल सौदे से जुड़ी कई रिपोर्ट छापी हैं जिनमें बताया गया है कि सरकार ने कई नियमों का उल्लंघन किया है.''
वेणुगोपाल ने कहा कि रक्षा सौदों का संबंध राष्ट्र की सुरक्षा से होता है और ये काफ़ी संवेदनशील हैं. एजी ने कहा कि अगर सब कुछ मीडिया, कोर्ट और पब्लिक डिबेट में आएगा तो दूसरे देश सौदा करने से बचेंगे.
नरेंद्र मोदी सरकार ने फ़्रांस से 2016 में रफ़ाल सौदे पर हस्ताक्षर किया था. 59,000 करोड़ रुपए की इस डील में फ़्रांस की डसॉ कंपनी से भारत को 36 लड़ाकू विमान मिलने हैं.
चेक रिपब्लिक के रहने वाले माइकल प्रासेक ने शायद ये सोचा भी न हो कि जिस शेर को वो पाल रहे हैं और प्रशासन से लड़कर भी अपने पास रख रहे हैं, वो उनकी ही जान ले लेगा.
33 साल के माइकल प्रासेक की लाश उसी पिंजरे में मिली जहां उन्होंने अपना प्यारा शेर रखा था.
माइकल प्रासेक अपने घर के पीछे एक शेर और शेरनी को पाल रहे थे. वह साल 2016 में इस शेर को लेकर आए थे और तब उसकी उम्र नौ साल थी. इसके बाद प्रजनन के लिए पिछले साल वो एक शेरनी को भी लेकर आए.
लेकिन माइकल जब इन्हें लेकर आए तो आसपास के लोगों ने इस पर आपत्ति जताई थी. उन्हें डर था कि शेर और शेरनी लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
पर इनसे जुड़े जोखिम जानने के बावजूद भी माइकल जानवरों को जीडीशोफ गांव में अपने घर के पीछे बने बाड़ों में रखते रहे.
प्रशासन ने भी उन्हें ऐसे जंगली जानवर रखने की अनुमति नहीं दी थी. पहले उन्हें पिंजरे बनाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था और बाद में अवैध प्रजनन के लिए जुर्माना लगाया था.
चेक रिपब्लिक में इन जानवरों को रखने की कोई वैकल्पिक सुविधा न होने और जानवरों के साथ प्रताड़ना के कोई प्रमाण न मिलने की वजह से शेर और शेरनी को वहां से नहीं हटाया जा सका.
इस तरह उन्हें शेर को रखने की मंज़ूरी मिल गई. लेकिन पिछली गर्मियों में माइकल प्रासेक तब ख़बरों में आ गए जब वो अपनी शेरनी को लेकर वॉक पर गए थे और एक साइकिल सवार उनकी शेरनी से टकरा गया था.
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