राहुल का तंज- भाजपा का घोषणापत्र बंद कमरे में बना, यह अलग-थलग पड़े व्यक्ति की आवाज

नई दिल्ली. राहुल गांधी ने भाजपा के घोषणापत्र पर निशाना साधा है। राहुल ने ट्वीट किया कि भाजपा का मैनिफेस्टो एक बंद कमरे में तैयार किया गया। यह एक अलग-थलग पड़ चुके उस व्यक्ति की आवाज है जो अदूरदर्शी और घमंडी है। राहुल का दावा है कि कांग्रेस का घोषणापत्र बाकायदा लोगों से चर्चा कर तैयार किया गया। इसमें 10 लाख से ज्यादा लोगों की आवाज है। इसलिए यह बुद्धिमत्तापूर्ण और ताकतवर है।

'सुरक्षा-समृद्धि का संकल्प पत्र'
भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए सोमवार को 75 संकल्पों का घोषणापत्र जारी किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह सुशासन, राष्ट्र की सुरक्षा और समृद्धि का संकल्प पत्र है। गांव, गरीब और किसान हमारे केंद्र में है। पेय जल की समस्या खत्म करने के लिए हम अलग जल शक्ति मंत्रालय बनाएंगे और नल से जल पहुंचाने पर जोर देंगे। ऐसा आधार तय करेंगे कि 2047 तक देश विकासशील से विकसित देशों की सूची में आ जाए।

मोदी ने कहा- ''राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में कमेटी ने 2-3 महीने मेहनत कर लोगों के मन की आकांक्षाओं को सुना। पहली बार इतने व्यापक स्तर पर जनता के साथ विचार विमर्श हुआ। यह लोकतंत्र की सच्ची प्रेरणा है। आमतौर पर मैनिफेस्टो 2024 के लिए है। लेकिन जनता हमारा हिसाब ढंग से मांग सके इसलिए हमने 2022 तक महापुरुषों ने जिन चीजों को लेकर बलिदान दिया था, हम उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए कुछ काम कर लें, इसके लिए 75 साल 75 संकल्प लिए हैं।

कांग्रेस के घोषणापत्र में अलग किसान बजट का वादा
कांग्रेस ने 2 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के लिए घोषणापत्र जारी किया था। इसे जन आवाज नाम दिया गया। इस दौरान राहुल कहा था कि मैनिफेस्टो में 5 प्रमुख वादे किए गए हैं। किसानों के लिए अलग बजट लाया जाएगा। साथ ही कृषि कर्ज के डिफॉल्टरों पर फौजदारी (क्रिमिनल) मामला दर्ज नहीं होगा। राहुल ने 'गरीबी पर वार, 72 हजार' का नारा भी दिया। घोषणापत्र के मुताबिक, कांग्रेस देशद्रोह को परिभाषित करने वाली धारा 124 (ए) को खत्म किया जाएगा। इस पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि देशद्रोह की धारा खत्म करने का कांग्रेस का वादा देश की एकता के लिए खतरा है।

2.77 एकड़ परिसर के अंदर है विवादित जमीन
अयोध्या में 2.77 एकड़ परिसर में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद का विवाद है। इसी परिसर में 0.313 एकड़ का वह हिस्सा है, जिस पर विवादित ढांचा मौजूद था और जिसे 6 दिसंबर 1992 को गिरा दिया गया था। रामलला अभी इसी 0.313 एकड़ जमीन के एक हिस्से में विराजमान हैं। केंद्र की अर्जी पर भाजपा और सरकार का कहना है कि हम विवादित जमीन को छू भी नहीं रहे।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 9 साल पहले फैसला सुनाया था
इलाहाबाद हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने 30 सितंबर 2010 को 2:1 के बहुमत से 2.77 एकड़ के विवादित परिसर के मालिकाना हक पर फैसला सुनाया था। यह जमीन तीन पक्षों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला में बराबर बांट दी गई थी। हिंदू एक्ट के तहत इस मामले में रामलला भी एक पक्षकार हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि जिस जगह पर रामलला की मूर्ति है, उसे रामलला विराजमान को दे दिया जाए। राम चबूतरा और सीता रसोई वाली जगह निर्मोही अखाड़े को दे दी जाए। बचा हुआ एक-तिहाई हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया जाए।

इस फैसले को निर्मोही अखाड़े और सुन्नी वक्फ बोर्ड ने नहीं माना और उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

शीर्ष अदालत ने 9 मई 2011 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट में यह केस तभी से लंबित है।

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